भारत-चीन सीमा पर तनाव के लिए चीन जिम्मेदार, LAC पर शांति बनाए रखने की जरूरत: विदेश मंत्रालय
अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ आमने-सामने की स्थिति के बीच ITBP की शौर्य कमांडो यूनिट ने दिखाई क्षमता, हर बॉर्डर बटालियन में होगी तैनाती
रिपोर्ट : प्रीती पांडेय
भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) तय गश्त के तरीकों से अलग हटकर गतिविधियां करती है। भारत ने दोहराया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए बेहद जरूरी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए भारत और चीन राजनयिक तथा सैन्य स्तर पर पहले से मौजूद व्यवस्थाओं के माध्यम से बातचीत जारी रखे हुए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सीमा पर गलतफहमी और किसी भी तरह के गलत आकलन से बचना है।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए LAC की समझ को कुछ उपयुक्त क्षेत्रों में और स्पष्ट करने के तरीकों पर चर्चा करने पर सहमत हुए हैं।
अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ आमने-सामने की स्थिति
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान बल की नई शौर्य कमांडो यूनिट की क्षमताओं का उल्लेख किया। 
कपूर ने गुरुवार को बताया कि ITBP अपनी युद्धक तैयारियों को मजबूत करने के लिए हर सीमा बटालियन में शौर्य कमांडो तैनात करेगा। चीन के साथ भारत की 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बल अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
चीन से मुकाबले के लिए आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर
राजस्थान के अलवर स्थित ITBP बेस पर जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि चीन जैसी चुनौती का सामना करने के लिए अब केवल पारंपरिक युद्ध पद्धतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने चीन को भारत का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया और आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ITBP अपने आधुनिकीकरण अभियान के तहत उभरती युद्ध तकनीकों, विशेष प्रशिक्षण और विशेष अभियानों में दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। शौर्य कमांडो यूनिट को सीमा पर बल की परिचालन क्षमता मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
24 अक्टूबर को बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले सामने आए इन बयानों से स्पष्ट है कि भारत चीन सीमा पर निगरानी, प्रशिक्षण और युद्धक तैयारियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अनिवार्य है।





