NSE के सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर NSDC की शुरुआत, NABARD ने किया 4 करोड़ रुपये का निवेश; भाषा प्रशिक्षण से लेकर विदेश में रोजगार तक की तैयारी करेगा कार्यक्रम; जापान और जर्मनी में नौकरी का रास्ता खोलेगी सरकार की स्किल ट्रेनिंग, मध्य प्रदेश के 600 युवाओं को मिलेगा मौका
रिपोर्ट : प्रीती पांडेय
मुंबई, 23 अक्टूबर 2026। भारत के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने मुंबई में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) की शुरुआत के अवसर पर ‘बेल रिगिंग सेरेमनी’ में हिस्सा लिया। इस पहल के तहत मध्य प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) परिवारों के 600 युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।

इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें कौशल विकास को रोजगार के वास्तविक परिणामों से जोड़ने के लिए एक अभिनव वित्तीय मॉडल अपनाया गया है। नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने NSDC के पहले जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) इश्यू में 4 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। लगभग 11.25 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी कौशल प्रदान करने और उनके लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर केंद्रित है।
जापान और जर्मनी में नौकरी के लिए मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
इस कार्यक्रम के तहत 600 युवाओं को दो समूहों में बांटा जाएगा। इनमें से 300 उम्मीदवारों को जापान और 300 उम्मीदवारों को जर्मनी में रोजगार के अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा। युवाओं को संबंधित देशों की भाषा का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल और कार्यस्थल से जुड़ी आवश्यकताओं की जानकारी भी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान विदेशी भाषा, रोजगार संबंधी तैयारी और संबंधित देश में काम करने के लिए जरूरी क्षमताओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम में केयरगिविंग, हॉस्पिटैलिटी, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार अवसरों को ध्यान में रखा गया है। प्रशिक्षण NSDC की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NSDC International Limited के माध्यम से दिया जाएगा।
कार्यक्रम के अनुसार, सफलतापूर्वक विदेश में नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों की संभावित मासिक कमाई जापान में लगभग 1 लाख से 1.2 लाख रुपये और जर्मनी में लगभग 1.1 लाख से 3.2 लाख रुपये तक हो सकती है। वास्तविक आय संबंधित नौकरी, योग्यता और रोजगार की शर्तों पर निर्भर करेगी।
11.25 करोड़ रुपये की परियोजना में निवेश और सरकारी सहायता का मेल
इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी वित्तीय व्यवस्था है, जिसमें युवाओं के कौशल विकास के लिए सरकारी सहायता, सामाजिक निवेश और लाभार्थियों की भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया है।
परियोजना की अनुमानित लागत का 15 प्रतिशत हिस्सा लाभार्थियों की भागीदारी से, 35 प्रतिशत सोशल स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से जुटाए जाने वाले वित्तपोषण से और शेष 50 प्रतिशत मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सफल अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।
यह व्यवस्था रोजगार के परिणामों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। मध्य प्रदेश सरकार उम्मीदवारों के चयन और उन्हें कार्यक्रम से जोड़ने के साथ-साथ आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं तथा भाषा प्रयोगशालाओं के लिए भी सहयोग करेगी।
NSDC और मध्य प्रदेश सरकार के बीच सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड की द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत सार्वजनिक धन के उपयोग को रोजगार के मापने योग्य परिणामों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे कौशल विकास कार्यक्रमों में जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों के मूल्यांकन को बढ़ावा मिल सकता है।
जयंत चौधरी ने वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत से की भागीदारी की अपील
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति के साथ देश के लोगों के विकास में निवेश भी जरूरी है। सरकार ऐसा ढांचा तैयार कर सकती है, जो विकास को गति दे, लेकिन बड़े स्तर पर कौशल विकास के लिए सार्वजनिक संस्थानों, निजी निवेशकों और अन्य सहयोगियों को मिलकर काम करना होगा। 
उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सामूहिक निवेश को विश्वसनीय परियोजनाओं, पारदर्शिता और सत्यापन योग्य परिणामों से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।
जयंत चौधरी ने NSDC, NABARD, NSE, मध्य प्रदेश सरकार और अन्य सहयोगी संस्थानों को इस साझेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने वित्तीय संस्थानों और उद्योग जगत से रोजगार आधारित कौशल विकास पहलों में अधिक भागीदारी करने का आह्वान भी किया।
कमजोर वर्गों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
मध्य प्रदेश सरकार में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने कहा कि राज्य सरकार उन युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तथा रोजगार तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने इस साझेदारी को 600 युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी कौशल हासिल करने और जापान तथा जर्मनी में रोजगार की तैयारी करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, सफल रोजगार परिणामों से जुड़े सरकारी वित्तपोषण का यह मॉडल युवाओं और उनके परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।
NABARD और NSDC की साझेदारी से सामाजिक निवेश को मिलेगा बढ़ावा
NABARD के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि सोशल स्टॉक एक्सचेंज में संस्थान की भागीदारी विकास वित्तपोषण के नए मॉडलों को तलाशने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से संस्थागत और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी तथा सामाजिक निवेश को ठोस परिणामों में बदलने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
वहीं, NSDC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणकुमार पिल्लई ने कहा कि सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर कॉरपोरेशन की शुरुआत कौशल विकास और रोजगार आधारित कार्यक्रमों के लिए वित्तपोषण के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रभावी क्रियान्वयन, परिणामों के सत्यापन और सामाजिक वित्तपोषण में अधिक भागीदारी को आगे की प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार की कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनीषा सेनशर्मा, NSE के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीषकुमार चौहान तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी और संस्थागत प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
कौशल विकास से वैश्विक रोजगार तक पहुंच बनाने की पहल
NSDC की सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर शुरुआत कौशल विकास के लिए पारंपरिक सरकारी वित्तपोषण के अतिरिक्त नए संसाधन जुटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल में सामाजिक निवेश, सरकारी सहायता और रोजगार आधारित वित्तीय व्यवस्था को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है।
यदि कार्यक्रम अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए जरूरी प्रशिक्षण हासिल करने और बेहतर आजीविका की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यह मॉडल भविष्य में दूसरे कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
इस पहल का व्यापक उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना, उनकी कमाई की संभावनाएं बढ़ाना और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक प्रगति के नए रास्ते खोलना है।





