रिपोर्ट-संतेश्वर वर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए चयनित अभ्यर्थियों के चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर देने का निर्देश दिया है। नई नीति का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना और अभ्यर्थियों की पात्रता से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना है। इसके तहत हिंसक गतिविधियों के जरिए व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़ाव भी अभ्यर्थी की पात्रता को प्रभावित कर सकता है।
किन मामलों में प्रभावित होगी पात्रता?
नई नीति के अनुसार, केवल एफआईआर दर्ज होने या किसी मामले की जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा। अंतिम रूप से बरी होने, समझौते से निपटे मामलों और किशोर न्याय कानून के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी। हालांकि, हत्या, डकैती, दुष्कर्म, महिला की गरिमा भंग करने, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामलों में संलिप्तता सामने आने पर पात्रता प्रभावित हो सकती है।
सत्यापन लंबित होने पर भी मिल सकेगा नियुक्ति पत्र
नई व्यवस्था के तहत चरित्र सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने पर नियुक्ति पत्र रोकना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे मामलों में अभ्यर्थी से स्व-घोषणा पत्र और निर्धारित प्रपत्र लेकर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा। हालांकि, गलत जानकारी देने या सत्यापन में अपात्र पाए जाने पर नियुक्ति रद्द की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
नई नीति के तहत जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सत्यापन के लिए अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट सौंपनी होगी। तय समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर गृह विभाग इसकी निगरानी करेगा। सत्यापन के दौरान पुलिस या LIU अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी और न ही उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी।
यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। सरकार का उद्देश्य सामान्य आपराधिक आरोपों और गंभीर आपराधिक गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।





