लोड हो रहा है...
ब्रेकिंग न्यूज़
खबरें लोड हो रही हैं...
हमें फॉलो करें :

प्रदूषण से बचने के लिए घर में नहीं बैठ सकते, पटाखों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

रिपोर्ट-संतेश्वर वर्मा

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण और दीपावली पर पटाखे जलाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कई अहम दलीलें रखी गईं। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदूषण से बचाव, पटाखों के इस्तेमाल और बच्चों, बुजुर्गों व जानवरों के स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर विचार किया। मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान अमीकस क्यूरी ने दलील दी कि पटाखे जलाने से हवा में बड़ी मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और जहरीली गैसें फैलती हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग वायु प्रदूषण की समस्या से अच्छी तरह परिचित हैं। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि बेरियम युक्त पटाखों के मुद्दे पर आंतरिक चर्चा अभी पूरी नहीं हुई है।

बेरियम वाले पटाखों पर दिवाली के बाद हो सकती है सुनवाई

केंद्र सरकार की ओर से चर्चा पूरी नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक टाल दी। पटाखों में बेरियम की मात्रा और इससे जुड़े नियमों पर आगे विचार किया जाएगा। इस मुद्दे पर दिवाली के बाद सुनवाई होने की संभावना भी जताई गई है।

पटाखा निर्माताओं ने प्रतिबंध पर उठाए सवाल

पटाखा निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने दलील दी कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से उनकी तस्करी बढ़ सकती है और बाजार में अवैध पटाखों की बिक्री होने लगती है। उनके मुताबिक, ऐसे पटाखे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए अधिक नुकसानदेह हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रीन क्रैकर्स से प्रदूषण में 30 से 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि, इस दावे का वास्तविक प्रभाव पटाखों के प्रकार, उनके इस्तेमाल और उत्सर्जन के वैज्ञानिक आकलन पर निर्भर करता है।

चीनी पटाखों की जांच और सख्त कार्रवाई पर जोर

सुनवाई के दौरान जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने चीनी पटाखों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही। अदालत में नई पीढ़ी की सोच का भी जिक्र हुआ। साथ ही, पटाखों के इस्तेमाल से बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

प्रदूषण से बचने के लिए घरों में बंद नहीं रह सकते लोग

मामले का व्यापक सवाल यह है कि वायु प्रदूषण से बचाव के लिए लोगों की सामान्य गतिविधियों पर किस हद तक रोक लगाई जा सकती है। इसी संदर्भ में प्रदूषण से बचने के लिए घरों में बंद रहने की सीमा और व्यावहारिकता पर सवाल उठता है। हालांकि, इस टिप्पणी के सटीक शब्दों और संदर्भ की पुष्टि आधिकारिक अदालती रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

फिलहाल, बेरियम युक्त पटाखों और दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत में रखी गई दलीलों और अंतिम न्यायिक आदेश के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें