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यूपी राज्यसभा चुनाव में जयंत चौधरी को झटका! BJP के 8 उम्मीदवारों के ऐलान से अटकलों पर लगा विराम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर को खत्म हो गई। इससे पहले चर्चा थी कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने कोटे से जयंत चौधरी को एक बार फिर राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि, भाजपा ने राज्यसभा के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिसके बाद इन कयासों पर ब्रेक लग गया।

BJP के 8 उम्मीदवारों के ऐलान से बदली तस्वीर

राजनीतिक गलियारों में पिछले कुछ समय से चर्चा थी कि NDA के सहयोगी दल RLD के अध्यक्ष जयंत चौधरी को भाजपा के समर्थन से उच्च सदन में दोबारा भेजा जा सकता है। माना जा रहा था कि NDA के साथ RLD के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा उनके नाम पर विचार कर सकती है।

लेकिन भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवारों की घोषणा के बाद जयंत चौधरी को लेकर चल रही चर्चाएं कमजोर पड़ गईं। हालांकि, जयंत चौधरी की मौजूदा राज्यसभा सदस्यता जुलाई 2028 तक है, इसलिए उन्हें तत्काल राज्यसभा भेजे जाने की कोई संवैधानिक आवश्यकता भी नहीं थी।

2022 में सपा के समर्थन से पहुंचे थे राज्यसभा

जयंत चौधरी जुलाई 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोकदल के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा में RLD के आठ विधायक थे। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 34 वोटों की जरूरत थी।

सपा, रालोद और सहयोगी दलों के समर्थन से गठबंधन के पास तीन उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति थी। इसी समीकरण के तहत जयंत चौधरी को सपा के समर्थन से तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया था।

इसके बाद खतौली विधानसभा उपचुनाव में रालोद की जीत हुई और पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई।

2024 में बदल गया सियासी समीकरण

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद ने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर NDA का दामन थाम लिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि सपा के समर्थन से मिली राज्यसभा सीट के बदले जयंत चौधरी भाजपा के सहयोग से दोबारा उच्च सदन पहुंच सकते हैं।

हालांकि, भाजपा की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद फिलहाल ऐसी किसी संभावना को लेकर चल रही अटकलें थम गई हैं।

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के रिश्तों में आई तल्खी

सपा से अलग होने के बाद अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच राजनीतिक रिश्तों में भी तल्खी देखने को मिली। अखिलेश यादव ने एक बयान में बिना नाम लिए ‘चवन्नी का रुपया’ बनने के बाद साथ छोड़ने की टिप्पणी की थी।

जयंत चौधरी ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी और अधिक स्पष्ट हो गई।

फिलहाल जयंत चौधरी NDA का हिस्सा हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में यूपी राज्यसभा चुनाव को लेकर उनके नाम पर चल रही चर्चाओं का खत्म होना राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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