देखें वीडियो –https://youtube.com/shorts/vWw7M6xJ_ZE
बिहार में महागठबंधन का राजभवन मार्च, पटना में जमकर हंगामा; बैरिकेडिंग पर चढ़े कार्यकर्ता, तेजस्वी समेत नेताओं को ले जाया गया लोकभवन
पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को राजधानी पटना में बड़े राजनीतिक प्रदर्शन में बदल गया। महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजभवन मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्कामुक्की हुई और हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की।
महागठबंधन का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं और बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्ष लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर महागठबंधन ने बिहार में जिला स्तर पर प्रदर्शन और पटना में राजभवन मार्च का ऐलान किया था।
शहीद स्मारक चौक से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
राजभवन मार्च के लिए महागठबंधन के नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पटना के शहीद स्मारक चौक के आसपास जुटे। आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने राजभवन की ओर बढ़ना शुरू किया।
मार्च को देखते हुए पुलिस ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शन के रास्ते में कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन भी मौके पर रखे गए थे।
जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और कई नेताओं ने बैरिकेड पार कर आगे जाने की कोशिश की।
बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़े तेजस्वी यादव
प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव भी बैरिकेडिंग पार करके आगे बढ़ते नजर आए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार राजभवन की ओर जाने की मांग करते रहे। कुछ देर के लिए मौके पर स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
बाद में तेजस्वी यादव समेत प्रदर्शन में शामिल नेताओं और प्रतिनिधिमंडल को पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियों से लोकभवन ले जाया गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी, मीसा भारती और अन्य नेताओं के एसडीपीओ की गाड़ी से लोकभवन जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की ओर से बाद में स्थिति स्पष्ट की गई। पुलिस ने कहा कि तेजस्वी यादव या किसी अन्य प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार अथवा हिरासत में नहीं लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल को बातचीत और आगे की प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लोकभवन ले जाया गया।
प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा
प्रदर्शन के बीच महागठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल को राजभवन ले जाया गया। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता शकील अहमद खान और माले नेता संदीप सौरभ समेत विपक्ष के अन्य नेता शामिल रहे।
विपक्षी नेताओं ने SIR को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। नेताओं का कहना था कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार लोकतंत्र की धरती है और विपक्ष लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।
अररिया समेत कई जिलों में भी प्रदर्शन
पटना के अलावा बिहार के दूसरे जिलों में भी INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। अररिया में जिला स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। यहां विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विरोध जताया।
प्रदर्शन के बाद गठबंधन के नेताओं ने चांदनी चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पुतले भी फूंके।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कहीं पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो कहीं गलत या संदिग्ध प्रविष्टियों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उनका दावा है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पहले भी हो चुका है राज्यव्यापी प्रदर्शन
महागठबंधन का यह प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ। इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को भी INDIA ब्लॉक ने बिहार में ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत आक्रोश मार्च और प्रदर्शन किया था। राज्य के सभी 534 प्रखंडों में विपक्षी दलों की ओर से प्रदर्शन किए जाने का दावा किया गया था।
अब पटना में हुए राजभवन मार्च के बाद बिहार की राजनीति में SIR का मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है। विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार से जोड़कर सरकार तथा चुनाव आयोग पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को नियंत्रित रखने पर जोर दिया जा रहा है।
राजभवन मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद यह मुद्दा बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रह सकता है।





