रिहाई के दो दिन बाद फिर जंतर-मंतर पहुंचे सौरव दास और आशुतोष रांका, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया
रिपोर्ट – संतेश्वर वर्मा
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर हिरासत में ले लिया। दोनों अपने कुछ साथियों के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई दोनों की रिहाई के महज दो दिन बाद हुई है।
50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड पर हुई थी रिहाई
इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन के सिलसिले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया था। बाद में सौरव दास और आशुतोष रांका को 50 हजार रुपये के जमानती बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था। साथ ही, उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्तों का पालन करने को कहा गया था। हालांकि, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जमानती बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया था। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के सदस्यों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि 13 अक्टूबर की सुबह पार्टी के सदस्य तिरंगा लेकर जंतर-मंतर की ओर जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इनमेंआशुतोष रांका, सौरव दास, अजिंक्य शिंदे और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। हालांकि, इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर घटनाक्रम की अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का दावा
पुलिस की ये कार्रवाई गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद जिसके तहत दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था, इस फैसले के बाद देखने को मिली है। आदेश के अगले ही दिन, 13 अक्टूबर को CJP के सदस्य वहां प्रदर्शन करने पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों की हिरासत को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, जंतर-मंतर पर लागू प्रतिबंधों, आदेश की शर्तों और पुलिस की कार्रवाई के कानूनी आधार की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के अधिकार को लेकर फिर चर्चा
सौरव दास और आशुतोष रांका की दोबारा हिरासत के बाद राजधानी में विरोध प्रदर्शन की अनुमति और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करने के नियमों को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। इस मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोपों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस का पक्ष और संबंधित आदेशों की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।





