नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में महाकवि और गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ की स्मृति में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘कारवां गीतों का… नीरज’ ने हिंदी साहित्य और संगीत प्रेमियों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में नीरज जी की कालजयी रचनाओं और उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उनके जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को साझा किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन नीरज फाउंडेशन की ओर से किया गया। फाउंडेशन के संरक्षक और भारत एक्सप्रेस के चेयरमैन श्री उपेंद्र राय की गरिमामयी मौजूदगी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री एस.पी. सिंह बघेल सहित साहित्य, कला और संस्कृति जगत से जुड़े कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
मंच पर बेटों ने साझा कीं नीरज जी की यादें
कार्यक्रम का सबसे भावुक और खास हिस्सा तब रहा, जब महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ के दोनों बेटे शशांक और मृगांक मंच पर पहुंचे। उन्होंने अपने पिता के जीवन, व्यक्तित्व, संघर्ष और साहित्यिक सफर से जुड़ी यादों को साझा किया। नीरज जी के साथ बिताए पलों को याद करते हुए उन्होंने उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं पर भी प्रकाश डाला, जिन्हें आमतौर पर कम ही लोग जानते हैं।
मंच से नीरज जी की रचनात्मक यात्रा और हिंदी साहित्य में उनके योगदान की चर्चा हुई तो सभागार में मौजूद दर्शक भावुक नजर आए।
गीतों ने बांधा समां
कार्यक्रम को यादगार बनाने में Sonvi Events की ओर से प्रस्तुति देने पहुंचे गायकों मिलिंद, देबो मुखर्जी, शिफा अंसारी, प्रदीप शर्मा और पुनीत कुमार की अहम भूमिका रही। इन कलाकारों ने गोपालदास ‘नीरज’ जी द्वारा रचित लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज देकर शाम को संगीतमय बना दिया।
नीरज जी के गीतों की एक के बाद एक प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंजता रहा। दर्शक उनकी कालजयी रचनाओं में डूबे नजर आए और हर प्रस्तुति के बाद कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
साहित्य, संगीत और स्मृतियों का खूबसूरत संगम
‘कारवां गीतों का… नीरज’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी गीत-साहित्य के महान रचनाकार गोपालदास ‘नीरज’ को श्रद्धापूर्वक याद करने का एक प्रयास रहा। कार्यक्रम में जहां उनके साहित्यिक सफर और जीवन की स्मृतियां साझा की गईं, वहीं उनके लिखे गीतों ने उनकी रचनात्मक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
उपेंद्र राय की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य और संगीत के प्रति दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। नीरज जी की अमर रचनाओं को सुनने के लिए सभागार में मौजूद दर्शकों ने लगातार तालियों से कलाकारों और वक्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
यह शाम इस बात की गवाह बनी कि महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी कविताएं आज भी लोगों के दिलों में उसी शिद्दत से जीवित हैं।





