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यूपी राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, हरदीप पुरी समेत 8 मौजूदा सांसदों का टिकट कटा

यूपी राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 मौजूदा सांसदों का टिकट कटा; हरदीप पुरी का नाम भी शामिल

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी ने यूपी की आठ राज्यसभा सीटों के लिए जिन नामों का ऐलान किया है, उनमें एक भी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा जगह नहीं दी गई है। इस फैसले ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीजेपी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के इस फैसले को संगठन में नए चेहरों को आगे बढ़ाने और यूपी के सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हरदीप पुरी समेत इन नेताओं को नहीं मिला रिपीट टिकट

उत्तर प्रदेश कोटे से जिन बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा के अलावा अरुण सिंह, नीरज शेखर, गीता शाक्य, बृजलाल और सीमा द्विवेदी शामिल हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी उन नेताओं में थे, जिनकी राज्यसभा सीट इस चुनाव चक्र में शामिल है। हालांकि, 11 सितंबर को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी।

बीजेपी की ओर से इन पुराने चेहरों को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से पार्टी के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।

क्या 2027 के चुनाव के लिए तैयार हो रहा नया सामाजिक समीकरण?

बीजेपी की घोषित सूची पर नजर डालें तो इसमें जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर संतुलन बनाने की कोशिश नजर आती है। उम्मीदवारों में ब्राह्मण, ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेताओं को जगह दी गई है।

राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। वहीं धर्मपाल सिंह लोधी समाज से जुड़े हैं। पाल और कुर्मी समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके अलावा प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार के रूप में दो महिला चेहरों को भी सूची में शामिल किया गया है।

ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी राज्यसभा के जरिए उन सामाजिक समूहों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है, जिनका असर आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकता है।

संगठन से जुड़े चेहरों पर भी भरोसा

उम्मीदवारों की सूची में ऐसे नेताओं को भी स्थान मिला है, जिनकी पहचान संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़ी रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री रह चुके धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजने का फैसला भी इसी दिशा में देखा जा रहा है।

बीजेपी के लिए राज्यसभा की यह सूची सिर्फ उच्च सदन में संख्या मजबूत करने तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसके जरिए पार्टी संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और 2027 के चुनावी अभियान के लिए नए चेहरों को तैयार करने की रणनीति पर भी काम करती दिख रही है।

2027 से पहले विधायकों की भी हो रही है समीक्षा

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों का फीडबैक जुटाया है जहां उसके मौजूदा विधायक हैं।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी और एंटी-इनकंबेंसी का फीडबैक मिला है। विधायकों की क्षेत्र में सक्रियता, स्थानीय संगठन के साथ तालमेल और मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे पहलुओं को भी समीक्षा का हिस्सा बताया गया है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवारों और संगठन से जुड़े फैसलों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से फीडबैक लिया जा रहा है। हालांकि, इन दावों पर पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नहीं मिलने से कैबिनेट पर सवाल

राज्यसभा टिकट की सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं होने के बाद सबसे बड़ा सवाल केंद्र सरकार में संभावित बदलाव को लेकर उठ रहा है।

दोनों नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें किसी अन्य माध्यम से संसद में लाया जाता है या फिर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बदलाव की स्थिति बनती है।

संविधान के अनुच्छेद 75(5) के मुताबिक, यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने की अवधि तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता, तो उसे मंत्री पद छोड़ना होता है। हालांकि, फिलहाल बीजेपी की ओर से कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।

बीजेपी ने यूपी के अलावा उत्तराखंड की राज्यसभा सीट के लिए दिनेश आर्य को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पश्चिम बंगाल की उपचुनाव वाली सीट के लिए टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुईं रुक्मिणी कोयल मलिक को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

BJP की रणनीति में क्या दिख रहा है?

राज्यसभा उम्मीदवारों की नई सूची को सिर्फ सांसदों के बदलाव के तौर पर देखना शायद पर्याप्त नहीं होगा। पुराने चेहरों को हटाकर नए सामाजिक और संगठनात्मक चेहरों को मौका देना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि बीजेपी यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक टीम को नए सिरे से तैयार करना चाहती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्यसभा के लिए किए गए इस बदलाव का असर आने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और संगठनात्मक फेरबदल पर कितना दिखाई देता है।

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