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SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

SIR विवाद और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

रिपोर्ट- संतेश्वर वर्मा

दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। करीब तीन दर्जन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती दी गई है।

चुनाव आयोग को नोटिस, जवाब दाखिल करने के लिए मिला समय

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली, कथित एकतरफा फैसलों और फॉर्म-6 से जुड़े विवाद पर दाखिल याचिकाओं के संबंध में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्यसभा सांसद डोला सेन की नई याचिका पर भी चुनाव आयोग और अन्य पक्षों से जवाब मांगा।

हलफनामा देर से मिलने पर मांगा गया समय

याचिकाकर्ता राकेश सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग का हलफनामा सुनवाई से एक रात पहले मिला था। ऐसे में उसका जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय देते हुए अगली सुनवाई 17 नवंबर के लिए निर्धारित कर दी।

फॉर्म-6 पर क्या है विवाद?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आयोग ने 248 पन्नों का जवाब दाखिल किया है। उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरी की ओर से दायर हलफनामे में SIR प्रक्रिया का बचाव किया गया है।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

विपक्षी दलों की याचिकाओं में क्या मांग?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती दी गई है। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं की ओर से दायर याचिका भी शामिल है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ महत्वपूर्ण फैसले अकेले लिए, जबकि उन्हें सर्वसम्मति से लिया जाना चाहिए था। याचिकाओं में वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है। इसके अलावा, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को भी चुनौती दी गई है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी, जहां चुनाव आयोग के जवाब और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।

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