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दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत से ही बिगड़ी हवा, अगले 10 दिनों में बढ़ सकती है परेशानी

नई दिल्ली: सर्दियों के दस्तक देने से पहले ही दिल्ली-एनसीआर की हवा चिंता बढ़ाने लगी है। राजधानी में अक्टूबर की शुरुआत के साथ प्रदूषण का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है। रविवार, 4 अक्टूबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 187 दर्ज किया गया। यह इस सीजन का अब तक का सबसे खराब स्तर है और करीब 83 दिनों में राजधानी में दर्ज सबसे ऊंचा AQI भी रहा।

हालांकि औसत AQI अभी ‘मॉडरेट’ श्रेणी में है, लेकिन कई इलाकों में स्थिति इससे कहीं ज्यादा खराब रही। रविवार को दिल्ली के कम से कम 19 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा ‘पुअर’ कैटेगरी में पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, हवा की कम रफ्तार, बढ़ती धूल और पंजाब-हरियाणा समेत आसपास के राज्यों में पराली जलाने की शुरुआत आने वाले दिनों में स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

लगातार पांचवें दिन बढ़ा प्रदूषण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 196 तक पहुंच गया था। हालांकि शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत AQI 187 रहा।

पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदूषण में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। शुक्रवार को AQI 174, शनिवार को 171 और रविवार को 187 दर्ज किया गया। यानी राजधानी में लगातार पांचवें दिन हवा खराब स्तर पर बनी रही।

इन इलाकों में सबसे खराब रही हवा

रविवार शाम 4 बजे के CPCB आंकड़ों में मुंडका सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा। यहां AQI 273 दर्ज किया गया। इसके बाद CRRI मथुरा रोड और नरेला में AQI 258 रहा।

जहांगीरपुरी में भी हवा की स्थिति खराब रही और यहां AQI 237 दर्ज किया गया।

दिल्ली से बाहर एनसीआर के कुछ शहरों में भी स्थिति चिंताजनक रही। नोएडा का AQI 281 और गाजियाबाद का 248 दर्ज किया गया, जबकि ग्रेटर नोएडा में AQI 171 रहा।

मौसम बना प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम की भूमिका काफी अहम है। हवा की गति कम होने पर प्रदूषण फैलकर दूर नहीं जा पाता और उसके कण वातावरण में जमा होने लगते हैं।

पूर्व CPCB वैज्ञानिक दीपांकर साहा के मुताबिक, किसी क्षेत्र में प्रदूषण पैदा करने वाले स्रोत काफी हद तक सालभर मौजूद रहते हैं, लेकिन मौसम की परिस्थितियां यह तय करती हैं कि प्रदूषक कितनी तेजी से फैलेंगे या किसी इलाके में जमा होंगे।

सितंबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश से दिल्ली की हवा को कुछ राहत मिली थी। लेकिन बारिश रुकने के बाद तापमान में बढ़ोतरी और हवा की रफ्तार कम होने से धूल और दूसरे प्रदूषक दोबारा वातावरण में टिकने लगे।

उत्तर-पश्चिमी हवाएं बढ़ा सकती हैं मुश्किल

SAFAR के संस्थापक और NIAS के प्रोफेसर गुफरान बेग के अनुसार, जैसे-जैसे मौसम ठंडा होगा, उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाओं का प्रभाव बढ़ सकता है। इन हवाओं के साथ आसपास के राज्यों से आने वाले प्रदूषक दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित कर सकते हैं।

यही वह समय होता है जब दिल्ली में सर्दियों से जुड़ी प्रदूषण की समस्या धीरे-धीरे गंभीर होने लगती है।

जुलाई में भी ‘पुअर’ कैटेगरी में पहुंचा था AQI

इस साल दिल्ली को प्रदूषण की मार सिर्फ अक्टूबर में ही नहीं झेलनी पड़ी है। 24 जुलाई को राजधानी का AQI 246 तक पहुंच गया था, जो ‘पुअर’ श्रेणी में आता है।

उस समय दिल्ली-एनसीआर में हवा खराब होने के पीछे पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आई धूल भरी हवाओं को प्रमुख वजह माना गया था। CAQM के अनुसार, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की तरफ से आई धूल ने PM10 के स्तर को बढ़ाने में भूमिका निभाई थी।

सड़क की धूल और निर्माण कचरा भी बड़ी समस्या

प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CAQM की फ्लाइंग स्क्वाड टीमों ने शनिवार को दिल्ली के रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के आसपास निरीक्षण किया।

चार टीमों ने PWD के तहत आने वाली करीब 25 सड़कों के लगभग 35 किलोमीटर हिस्से का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान 17 स्थानों पर सड़क किनारे धूल और निर्माण एवं विध्वंस से जुड़ा कचरा मिला।

इससे साफ है कि दिल्ली की हवा पर सिर्फ बाहरी स्रोतों का असर नहीं है। सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां और स्थानीय प्रदूषण भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अगले 10 दिनों में क्या होगा?

Air Quality Early Warning System के अनुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों तक दिल्ली की हवा ‘मॉडरेट’ श्रेणी में रह सकती है। हालांकि इसके बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका है और अगले 10 दिनों में AQI ‘पुअर’ कैटेगरी तक पहुंच सकता है।

इसका एक बड़ा कारण अक्टूबर के मध्य से पराली जलाने की घटनाओं में संभावित तेजी भी है। इस साल पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सितंबर से ही पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं।

15 से 23 सितंबर के बीच इन राज्यों में कुल 47 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें पंजाब में 25 और उत्तर प्रदेश में 19 घटनाएं शामिल थीं।

दिवाली और पराली का दौर बढ़ा सकता है दबाव

आने वाले हफ्तों में दिल्ली के लिए एक और चुनौती दिवाली भी है। इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह अवधि आमतौर पर पराली जलाने के सीजन से भी जुड़ी होती है।

यदि उस समय हवा की रफ्तार कम रही और वातावरण में प्रदूषकों को फैलने के लिए पर्याप्त परिस्थितियां नहीं मिलीं, तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।

गुफरान बेग के अनुसार, इस बार मौसम की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। सर्दियों में बारिश कम होने की स्थिति में प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं।

क्या इस बार प्रदूषण ज्यादा गंभीर होगा?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस साल दिल्ली में प्रदूषण पिछले वर्षों के मुकाबले निश्चित रूप से ज्यादा होगा। लेकिन अक्टूबर की शुरुआत में ही AQI का लगातार बढ़ना एक चेतावनी जरूर है।

अगर हवा की रफ्तार कम रही, पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं और स्थानीय स्तर पर धूल एवं निर्माण गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा ‘मॉडरेट’ से ‘पुअर’ और आगे ‘वेरी पुअर’ श्रेणी की ओर जा सकती है।

इसलिए अक्टूबर की शुरुआत में बढ़ता AQI राजधानी के लिए एक शुरुआती अलर्ट माना जा सकता है। आने वाले 10 दिन यह तय करने में अहम होंगे कि दिल्ली इस बार प्रदूषण के सीजन में कितनी तेजी से प्रवेश करती है।

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