Rehan Vadra Exhibition Controversy: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की दिल्ली में प्रस्तावित कला प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है। रेहान का आरोप है कि बीकानेर हाउस में उनकी प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज़ फाइनल’ शुरू होने से कुछ घंटे पहले दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी कई तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 70 तस्वीरें हटाए जाने का दावा किया गया है। मामले पर प्रियंका गांधी ने बेटे का समर्थन करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया है।

प्रदर्शनी शुरू होने से पहले तस्वीरें हटाने का आरोप
रेहान वाड्रा ने सोशल मीडिया पर साझा की गई इंस्टाग्राम स्टोरी में दावा किया कि बीकानेर हाउस के प्रबंधन ने उनकी प्रदर्शनी में लगी ज्यादातर कलाकृतियों को हटाने के लिए कहा। उनके मुताबिक, ये तस्वीरें दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित थीं और प्रदर्शनी शुरू होने से करीब पांच घंटे पहले उन्हें हटाने की स्थिति पैदा हुई।
रेहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि संबंधित तस्वीरों की विषयवस्तु को आपत्तिजनक माना गया। इस घटनाक्रम के बाद उनकी प्रदर्शनी को लेकर विवाद शुरू हो गया। हालांकि, तस्वीरों को हटाने के पीछे के कारणों पर बीकानेर हाउस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
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तिरंगे की तस्वीरें हटाने से किया इनकार
रेहान वाड्रा के मुताबिक, उनसे भारतीय तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा गया था। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वह भारतीय तिरंगे की तस्वीरों को प्रदर्शनी से नहीं हटाएंगे।
रेहान ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाद के बावजूद प्रदर्शनी को उपलब्ध कलाकृतियों के साथ जारी रखा जाएगा। उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों के पूरे संग्रह को प्रदर्शित करने के लिए किसी दूसरे स्थान की तलाश करने की बात कही।
रॉबर्ट वाड्रा ने प्रशासन की भूमिका पर उठाए सवाल
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इस विवाद पर रेहान के पिता और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनी शुरू होने से ठीक पहले तस्वीरें हटाने का दबाव बनाया गया, जबकि आयोजन से संबंधित पीडीएफ फाइल प्रशासन को एक सप्ताह पहले भेज दी गई थी।
रॉबर्ट वाड्रा के अनुसार, प्रशासन के अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनी स्थल का दौरा किया था और वहां लगाए गए डिस्प्ले भी देखे थे। उस समय किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई गई, लेकिन आयोजन शुरू होने से कुछ घंटे पहले परिस्थितियां बदल गईं।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी लगाने में लगभग दो दिन का समय लगता है। ऐसे में अंतिम समय पर तस्वीरों को हटाने की मांग से आयोजन प्रभावित हुआ। हालांकि, ये सभी दावे रॉबर्ट वाड्रा के बयान पर आधारित हैं।
‘हर किसी को अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए’
रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने परिस्थितियों के बावजूद प्रदर्शनी जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने रचनात्मक कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि आमंत्रित लोग प्रदर्शनी में पहुंचे। उनके मुताबिक, कला और रचनात्मकता के क्षेत्र में राजनीति को इस तरह शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने यह बात भी रेखांकित की कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार के अंतर्गत आता है।
प्रियंका गांधी ने बेटे के समर्थन में क्या कहा?

रेहान वाड्रा की मां और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर उनका समर्थन किया। उन्होंने अपने संदेश में सत्ता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सच के साथ खड़े रहने के महत्व पर जोर दिया।
प्रियंका गांधी ने लिखा, “जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो शायद उसे एहसास भी नहीं होता कि वह उसी सत्ता को खो चुका है, जिसे बचाने की कोशिश कर रहा है।”
उन्होंने आगे अपने बेटे से कहा कि वह सच के साथ खड़ा रहे और इस बात पर गर्व जताया कि वह अपने विचारों पर कायम है। प्रियंका की इस प्रतिक्रिया के बाद प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने का मामला राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
विरोध-प्रदर्शनों की तस्वीरों को लेकर क्यों उठा विवाद?
‘नो आइडिया इज़ फाइनल’ प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरें दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी बताई गई हैं। रेहान के आरोपों के अनुसार, इन्हीं तस्वीरों की विषयवस्तु को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसके अलावा, तिरंगे की तस्वीरों को हटाने के निर्देश का दावा भी इस विवाद का हिस्सा है।
फिलहाल, तस्वीरें हटाने के निर्णय के पीछे क्या कारण थे और इस संबंध में प्रशासन का क्या पक्ष है, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
यह विवाद कला की स्वतंत्रता, सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित प्रदर्शनियों और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर नई बहस खड़ी करता है। हालांकि, तस्वीरें हटाए जाने की परिस्थितियों और इसके पीछे के कारणों की पूरी तस्वीर प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।





