दिल्ली की हवा में घुला प्रदूषण का जहर, AQI 300 के पार; GRAP-1 लागू, मेट्रो चलाएगी 20 अतिरिक्त फेरे
रिपोर्ट: संतेश्वर वर्मा
नई दिल्ली। ठंड की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। तापमान में गिरावट, हवा की धीमी रफ्तार और वातावरण में धुंध के बीच राजधानी के कई इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक हो गया है। बुधवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 284 दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 160 था। वहीं, चांदनी चौक में AQI 306 तक पहुंच गया, जो बेहद खराब स्थिति का संकेत है।

प्रदूषण बढ़ने के साथ ही दिल्लीवासियों की चिंता भी बढ़ गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया गया है। इसके तहत धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता में सुधार की चुनौती बनी हुई है।
दिल्ली में तापमान गिरने के साथ बढ़ेगी प्रदूषण की चुनौती
मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक, 22 और 23 अक्टूबर को दिल्ली का अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रहने की संभावना है। 24 अक्टूबर को आसमान में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं और अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं, 27 अक्टूबर तक न्यूनतम तापमान गिरकर 17 डिग्री सेल्सियस तक आने का अनुमान है।
मौसम में बदलाव के साथ हवा की रफ्तार कम रहने पर प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा हो सकते हैं। इससे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
चांदनी चौक में AQI 306, कई इलाके खराब श्रेणी में
दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों के आंकड़े राजधानी में प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाते हैं। चांदनी चौक में AQI 306 दर्ज किया गया, जबकि बवाना में यह 274 रहा। आनंद विहार, बुराड़ी क्रॉसिंग और अशोक विहार समेत कई इलाकों में भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
प्रमुख इलाकों का AQI इस प्रकार दर्ज किया गया:
- चांदनी चौक: 306 — बहुत खराब
- बवाना: 274 — खराब
- बुराड़ी क्रॉसिंग: 226 — खराब
- आनंद विहार: 236 — खराब
- अशोक विहार: 223 — खराब
- आया नगर: 214 — खराब
- बदरपुर: 141 — मध्यम
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में PM10 का स्तर 281 और PM2.5 का स्तर 181 तक पहुंचा। हवा में मौजूद बारीक कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा से परेशानी हो सकती है।
GRAP-1 लागू, धूल और खुले में कचरा जलाने पर सख्ती

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP-1 के तहत निर्धारित उपाय तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस चरण में सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल कम करने, निर्माण स्थलों की निगरानी करने और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
संबंधित एजेंसियों को निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रवर्तन अभियान तेज किया गया है। इसके साथ ही सभी 12 जोन में धूल जमा होने वाली सड़कों की गहन सफाई कराई जा रही है।
167 वाटर स्प्रिंकलर और 40 एंटी-स्मॉग गन तैनात
धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर 167 वाटर स्प्रिंकलर और 40 एंटी-स्मॉग गन तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों, डंपिंग स्थलों, ईंधन संयंत्रों और ऊंची इमारतों पर भी 40 एंटी-स्मॉग गन लगाने की व्यवस्था बताई गई है।
इन उपकरणों का संचालन GRAP के लागू चरणों और संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा। इन उपायों का उद्देश्य हवा में उड़ने वाली धूल को कम करना और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना है।
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए संयुक्त टीमें गठित
प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रवर्तन टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें खुले में जैविक कचरा जलाने, निर्माण गतिविधियों से धूल फैलाने, प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल करने और मलबे की अवैध डंपिंग जैसे मामलों पर कार्रवाई करेंगी।
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी भी की जा रही है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों और मलबा निस्तारण के दौरान फैलने वाली धूल को नियंत्रित करना है।
125 स्थलों पर 360 डिग्री कैमरों से निगरानी
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट की अवैध डंपिंग पर रोक लगाने के लिए 125 निर्धारित स्थलों पर 360 डिग्री कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। नगर निगम ने सभी 250 वार्डों में मलबे के निस्तारण के लिए निर्धारित स्थान चिह्नित किए हैं।
इन स्थानों पर धूल नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम अनिवार्य किए गए हैं। मलबे के ढेर के आसपास कम से कम तीन मीटर ऊंची दीवारें लगाने, मलबे और पत्थर की गिट्टी को ढककर रखने या नियमित रूप से गीला करने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। मलबा ढोने वाले वाहनों को ढककर ले जाना भी जरूरी होगा, ताकि परिवहन के दौरान धूल न फैले।
प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली मेट्रो चलाएगी 20 अतिरिक्त फेरे
दिल्ली में प्रदूषण कम करने और निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से दिल्ली मेट्रो 22 अक्टूबर से कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे चलाएगी। अतिरिक्त फेरों से यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
इसके साथ ही मेट्रो निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों पर धूल नियंत्रण के उपाय तेज किए जाएंगे। निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना भी इस अभियान का अहम हिस्सा है।
दिल्ली की हवा पर बढ़ी निगरानी, प्रभावी कदम उठाने की जरूरत
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या हर साल गंभीर चुनौती बन जाती है। इस बार भी तापमान में गिरावट और कई इलाकों में बढ़ते AQI ने चिंता बढ़ा दी है। GRAP-1 के तहत सफाई, धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इन उपायों का जमीन पर सही तरीके से लागू होना जरूरी है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और प्रदूषण के आंकड़े यह तय करने में अहम होंगे कि राजधानी की हवा में कितना सुधार हो पाता है।





