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विजयादशमी पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘भारत में भी हुई रिजीम चेंज की कोशिश’, OTT और AI पर जताई चिंता

विजय दशमी पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत में भी हुई रिजीम चेंज की कोशिश, OTT और AI पर क्या बोले RSS प्रमुख?

रिपोर्ट: संतेश्वर वर्मा

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन के साथ की। इसके बाद उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों, भारत में कथित ‘रिजीम चेंज’ की कोशिशों, सामाजिक एकता, विकास और तकनीक के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।

‘रिजीम चेंज’ से परिस्थितियां बदलने का दावा सही नहीं: भागवत

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में सत्ता परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दावा किया जाता है कि ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन से परिस्थितियां बदल जाएंगी, लेकिन इससे समस्याओं का समाधान नहीं होता।

भागवत के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में अपने स्वार्थों को साधने वाले लोग और उनके समर्थक प्रभावशाली बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां दुनिया के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिल रही हैं और भारत उनके निशाने पर है।

‘भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने के प्रयास’

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में भी इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं।

भागवत ने कहा कि भारत अभी विकास की प्रक्रिया में है और देश का पूर्ण विकास होना बाकी है। ऐसे में चुनौतियां बनी रहेंगी। उन्होंने युवाओं की देश के लिए कुछ करने की इच्छा और प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की परिस्थितियां दूसरे देशों से अलग हैं।

नेपाल की त्रासदी से लिया विकास का सबक

मोहन भागवत ने नेपाल में आई त्रासदी का उल्लेख करते हुए समग्र और संतुलित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में भारत, तिब्बत, भूटान और चीन सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुए एकतरफा विकास के प्रभावों को समझना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विकास को केवल आर्थिक या भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए पर्यावरण, समाज और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

कैप्टन स्मित मच्छर का जिक्र, देश के प्रति समर्पण पर दिया जोर

अपने संबोधन में भागवत ने देश के प्रति समर्पण और बलिदान की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का जीवन भारत के लिए समर्पित हो जाए, तो यह सौभाग्य की बात है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि इसी भावना ने उन्हें अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करने की ताकत दी।

उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छर के कार्यों का उल्लेख करते हुए देश के प्रति इसी तरह की प्रतिबद्धता और समर्पण की भावना को महत्वपूर्ण बताया।

सामाजिक विविधता के बीच एकता बनाए रखने की अपील

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में भाषा, पंथ, परंपराओं और रीति-रिवाजों की विविधता है, लेकिन समाज के भीतर एकता और अपनापन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी अलग-अलग पहचान के बावजूद आपसी एकता का ध्यान रखना चाहिए और यह अपनापन व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।

OTT प्लेटफॉर्म के नियम और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर

मोहन भागवत ने डिजिटल सामग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी पहुंच रही है, लेकिन सही और गलत का आकलन किए बिना उसका इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।

उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने AI का सही और जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत भी बताई।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

RSS के विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मोहन भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय एकता, विकास, वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।

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