- राहुल गांधी का दावा- राष्ट्रपति ने नहीं नकारे ‘वोट चोरी’ के आरोप, अब सबूत देने को तैयार विपक्ष
- राष्ट्रपति भवन से निकलते ही राहुल गांधी का बड़ा बयान, ‘वोट चोरी’ के सबूत देने की पेशकश
राष्ट्रपति भवन से निकलते ही राहुल गांधी ने ऐसा बयान दिया, जिसने दिल्ली की सियासत को फिर गरमा दिया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवाल रखे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया।
राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्ष ने राष्ट्रपति को पूरा ज्ञापन सौंपा और कथित ‘वोट चोरी’ से जुड़े अपने आरोपों को उनके सामने रखा। राहुल का कहना है कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की बात को लेकर न तो उनसे बहस की और न ही उनके आरोपों को बैठक में खारिज किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने कथित चुनावी गड़बड़ियों के सबूत पेश करने को कहा।
यहीं से राहुल गांधी ने अपने बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति सबूत देखना चाहती हैं, तो विपक्ष उन्हें उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। राहुल ने दावा किया कि चुनावी गड़बड़ियों के मामले किसी एक जगह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग राज्यों में चुनावों को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र करते हुए चुनावी प्रक्रिया में धांधली का आरोप दोहराया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति उनके आरोपों को खारिज करेंगी और कहेंगी कि देश में चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो रहे हैं। लेकिन उनके मुताबिक, राष्ट्रपति की ओर से सबूत मांगे जाने की बात ने उन्हें हैरान कर दिया।
राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष के पास जो भी दस्तावेज, आंकड़े और अन्य सामग्री है, वह राष्ट्रपति के सामने रखी जाएगी। यानी अब विपक्ष अपने आरोपों को सिर्फ राजनीतिक मंच तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सबूतों के साथ आगे बढ़ाने का दावा कर रहा है।
लेकिन इस पूरे मामले में एक अहम बात समझना जरूरी है। राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार कर लिया है—यह राहुल गांधी के बयान से निकला दावा है, राष्ट्रपति की ओर से आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं। इसलिए इस मुलाकात को लेकर सामने आए दोनों पक्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
विपक्ष की तरफ से चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, कथित वोट चोरी और चुनावी पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है।
वहीं, अब राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है। बीजेपी लगातार विपक्ष से आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने को कहती रही है।
अब असली सवाल यही है—क्या राहुल गांधी और INDIA गठबंधन राष्ट्रपति के सामने अपने बताए सबूत पेश करेंगे? क्या उन दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होगी? और क्या चुनाव आयोग इन आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब देगा?
फिलहाल राष्ट्रपति भवन की इस मुलाकात ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष अपने आरोपों पर कायम है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इन दावों को राजनीतिक आरोप बता रही है।





