कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ के बाद 7 गिरफ्तार, 19 की मौत से उठा सुरक्षा पर सवाल; हाईकोर्ट के जज की निगरानी में जांच की मांग
कोलकाता, 18 अक्टूबर: दुर्गा पूजा की रौनक के बीच कोलकाता के चोरबागान इलाके में हुई भगदड़ ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। शनिवार शाम पूजा पंडाल में उमड़ी भीड़ के बीच अचानक मची अफरा-तफरी में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। घटना के अगले दिन पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि आखिर एक धार्मिक आयोजन में भीड़ को संभालने की व्यवस्था क्यों नाकाम हुई।
बारिश के बीच बिगड़े हालात
चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव पंडाल में शनिवार शाम बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू होने पर कई लोग पानी से बचने के लिए पंडाल की ओर बढ़े। सीमित जगह में लोगों की आवाजाही बढ़ने से स्थिति बिगड़ गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, संकरे रास्ते और निकास द्वार के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ा। धक्का-मुक्की के दौरान लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे के बाद घटनास्थल के बाहर जूते-चप्पल, बैग और अन्य सामान बिखरा दिखाई दिया।
स्थानीय लोगों ने भीड़ नियंत्रण और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों की कमी पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, हादसे में किस स्तर पर चूक हुई, इसका अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
पुलिस की कार्रवाई, सात लोगों की गिरफ्तारी
घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। शुरुआती चरण में 14 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। 18 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, इनमें से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार लोगों में पूजा समिति के पदाधिकारी, पंडाल निर्माण से जुड़े व्यक्ति और भीड़ नियंत्रण तथा निजी सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित कर्मचारी शामिल बताए गए हैं। पुलिस इनकी भूमिका के साथ आयोजन स्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भीड़ के दबाव को समय रहते क्यों नहीं नियंत्रित किया जा सका और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
मुख्यमंत्री ने की जांच की घोषणा
हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और उनके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने घटना की जांच कराने और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री की ओर से मामले की पड़ताल के लिए जांच व्यवस्था बनाने की घोषणा की गई है। साथ ही, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायाधीश की अगुवाई में तथ्य-जांच समिति गठित करने का अनुरोध करने की बात भी सामने आई है। जांच का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों और संभावित सुरक्षा चूकों को स्पष्ट करना है।
घायलों के इलाज पर प्रशासन का ध्यान
हादसे में घायल लोगों को कोलकाता के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से उपचार की व्यवस्था की समीक्षा की गई। 18 अक्टूबर की कुछ रिपोर्टों में अधिकांश घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई गई थी, हालांकि मरीजों की नवीनतम स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
इस बीच, प्रशासन ने शहर के दूसरे बड़े पूजा पंडालों में भीड़ नियंत्रण के इंतजामों की समीक्षा शुरू की है। अधिक भीड़ वाले कुछ स्थलों पर एहतियातन आम लोगों का प्रवेश अस्थायी रूप से रोकने की जानकारी भी सामने आई है।
मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये देने तथा उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात भी कही गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है।
अब जांच के नतीजों पर नजर
इस हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बारिश के बाद भीड़ का दबाव किस तरह बढ़ा, निकास व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और क्या किसी घोषणा या अव्यवस्था ने लोगों की घबराहट बढ़ाई।
फिलहाल सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों के निष्कर्ष यह तय करने में अहम होंगे कि इस त्रासदी के पीछे कौन-सी परिस्थितियां जिम्मेदार थीं और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।





