अंकिता भंडारी केस: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच का मुद्दा उठाया। राष्ट्रपति से नियुक्ति पर पुनर्विचार कराने और सीबीआई की जांच पूरी होने तक पदभार रोकने का किया अनुरोध।
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति का मुद्दा उठाया है। पत्र में उन्होंने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान से जुड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है, लेकिन जांच की गति धीमी है। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को नियुक्ति पर दोबारा विचार करने के लिए कहा जाए और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम पदभार ग्रहण न करें।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड ?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
मामले में एक कथित वीआईपी का जिक्र भी लगातार होता रहा है। अंकिता के परिवार और विभिन्न प्रदर्शनकारियों ने इस पहलू की जांच की मांग उठाई है। इसी मुद्दे को राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में प्रमुखता से रखा है।
सीबीआई जांच और वीआईपी एंगल पर सवाल
राहुल गांधी ने पत्र में उल्लेख किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान से जुड़ा सवाल अभी भी चर्चा में है। पत्र के अनुसार, इस साल जनवरी में उत्तराखंड सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। राहुल गांधी ने जांच की प्रगति पर चिंता जताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच जरूरी है।
उन्होंने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को इसी पृष्ठभूमि में उठाते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, गौतम को कथित अपराध से जोड़ने वाले आरोपों को जांच या न्यायिक प्रक्रिया से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद 74(1) का हवाला
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 74(1) का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सरकार को अपनी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकती हैं। इसी आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार से दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर दोबारा विचार कराने का अनुरोध किया।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि राज्यपाल का पद संवैधानिक महत्व रखता है और इस पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति जनता का विश्वास होना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रपति से अंकिता के परिवार की पीड़ा पर ध्यान देने और न्याय की मांग को गंभीरता से लेने की अपील की।
अंकिता के माता-पिता के विरोध का भी जिक्र
राहुल गांधी ने पत्र में अंकिता के माता-पिता के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार अब भी न्याय की मांग कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से परिवार को न्याय का भरोसा दिलाने और राज्यपाल पद की गरिमा बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
इस पत्र के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राष्ट्रपति कार्यालय और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।





