बिहार नाव हादसा: SDRF के देरी से पहुंचने पर उठे सवाल, लापता लोगों की तलाश जारी
रिपोर्ट - संतेश्वर वर्मा
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पटना। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों ने नाव की स्थिति, बचाव अभियान में कथित देरी और अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं, दुर्घटनाग्रस्त नाव सरकारी थी या निजी, इसको लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
13 अक्टूबर की रात रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ। नाव पर सवार लोग गंगा नदी पार कर दूसरे गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में पलट गई। हादसे में 13 बच्चों की मौत की खबर सामने आई, जबकि कई लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई। लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव दलों का अभियान जारी है।
जर्जर नाव को लेकर पहले ही दी गई थी सूचना
हादसे के बाद स्थानीय निवासी रवि यादव ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका दावा है कि दुर्घटनाग्रस्त नाव की खस्ताहाल स्थिति के बारे में अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी गई थी। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो नाव के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जवाबदेही तय करने का सवाल उठ सकता है।
ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा, खटिया और रस्सी से चलाया बचाव अभियान
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव पलटने के बाद शुरुआती बचाव प्रयासों में ग्रामीणों ने अहम भूमिका निभाई। नदी में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए खटिया और रस्सियों तक का सहारा लिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को सूचना देने के करीब एक घंटे बाद अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। उनका कहना है कि शुरुआती समय में सीमित संसाधनों के सहारे ही लोगों को बचाने की कोशिश करनी पड़ी। हालांकि, अधिकारियों के घटनास्थल पर पहुंचने के समय और बचाव अभियान में कथित देरी की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नदी से बचाकर निकाले गए घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने आपात स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। इन आरोपों के बीच अस्पताल प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। इलाज में देरी या चिकित्सा सुविधाओं की कमी की पुष्टि संबंधित अधिकारियों के बयान और जांच के बाद ही हो सकेगी।
वैशाली की डीएम के गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगी महिला
राघोपुर नाव हादसे के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द सामने आ रहा है। घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचीं वैशाली की जिलाधिकारी के गले लगकर एक महिला फूट-फूटकर रोने लगी। अपनों को खोने के गम में महिला के विलाप और आंसुओं ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। यह दृश्य हादसे की भयावहता और पीड़ित परिवारों की पीड़ा को बयां करता है।
बिहार सरकार ने 4 लाख और पीएम मोदी ने 2 लाख रुपये की सहायता का किया ऐलान
बिहार के वैशाली जिले में हुए इस दर्दनाक हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। बिहार सरकार मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देगी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को दो-दो लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
इसके अलावा, हादसे में घायल लोगों को केंद्र सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया गया है। दोनों घोषणाओं के अनुसार, पात्रता और भुगतान की पुष्टि होने पर प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल छह लाख रुपये की सहायता मिल सकती है। वास्तविक भुगतान और पात्रता की पुष्टि संबंधित प्रशासन से की जानी होगी।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने जताया शोक
राघोपुर में गंगा नदी में हुए नाव हादसे में बच्चों की मौत पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताई और मृतकों के परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति देने की कामना की।
इसके अलावा, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, बिहार कांग्रेस और अन्य नेताओं ने भी हादसे पर दुख जताया। नेताओं ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया।
हादसे ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
राघोपुर की यह त्रासदी नदी पार करने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या नाव की हालत की नियमित जांच की जाती थी? क्या दुर्घटना से पहले मिली शिकायतों पर कार्रवाई हुई थी? बचाव दल घटनास्थल पर कितनी देर में पहुंचे और घायलों को समय पर इलाज क्यों नहीं मिल पाया? इन सभी सवालों के जवाब हादसे की निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल, सबसे बड़ी जरूरत लापता लोगों की तलाश, पीड़ित परिवारों को सहायता और हादसे की परिस्थितियों की जांच सुनिश्चित करने की है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।





