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तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने पर हिरासत का मामला गरमाया, विपक्ष ने उठाए सवाल; स्टालिन ने मदद का दिया भरोसा

तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने पर कार्रवाई से सियासी घमासान, विपक्ष ने सरकार को घेरा; हिरासत में लिए गए सीजेपी कार्यकर्ताओं के समर्थन में उतरे बड़े नेता

दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगे के साथ प्रदर्शन करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कई बड़े नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकारों की बात उठाई है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना भी अपराध बन गया है? उन्होंने इस कार्रवाई को बेतुका करार दिया।

एमके स्टालिन ने की कानूनी सहायता की पेशकश

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी दोनों कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश करेगी।

स्टालिन ने आशंका जताई कि युवाओं को जेल भेजने जैसी कार्रवाई से विरोध की आवाज और मजबूत हो सकती है। साथ ही, उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की।

आदित्य ठाकरे ने उठाया राष्ट्रीय ध्वज का मुद्दा

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस मामले में सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि अपने देश में तिरंगा हाथ में लेने के लिए युवाओं को जेल क्यों जाना पड़ रहा है।

ठाकरे ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं के बीच संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा को इस पूरे मामले का अहम मुद्दा बताया।

राहुल गांधी ने कार्रवाई पर जताई नाराजगी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी दोनों कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है।

राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को कायरता बताते हुए कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और विपक्षी दल अलग-अलग मंचों से अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन वे अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर को जनता की आवाज उठाने की जगह बताते हुए इसे वापस हासिल करने की बात भी कही।

सीजेपी कार्यकर्ता बोले- कार्रवाई से नहीं डरेंगे

सीजेपी के सदस्य अजिंक्य शिंदे के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

शिंदे ने कहा कि इस कार्रवाई से कार्यकर्ताओं के हौसले कमजोर नहीं होंगे। वहीं, विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने, शांतिपूर्ण विरोध और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर बड़ी राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

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