बांग्लादेश के लिए भारत में बन रहे खास हरे रेल कोच, 915 करोड़ रुपये की डील में क्या है खास?
Indian Railway News: भारत की रेल कोच फैक्ट्री में तैयार किए गए हरे रंग के विशेष यात्री डिब्बे इन दिनों चर्चा में हैं। इन कोचों को बांग्लादेश रेलवे के लिए बनाया गया है। इनकी खासियत सिर्फ इनका रंग नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों के मुताबिक तैयार की गई सुविधाएं भी हैं। इनमें नमाज के लिए अलग स्थान, बच्चों की देखभाल के लिए विशेष कक्ष और मजबूत छत जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में तैयार हुए इन डिब्बों को लेकर एक और सवाल उठ रहा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह रेल परियोजना किस तरह आगे बढ़ रही है।
915 करोड़ रुपये का रेल समझौता, बांग्लादेश को मिलेंगे 200 कोच
इन विशेष यात्री डिब्बों का निर्माण बांग्लादेश रेलवे की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। इस परियोजना के तहत भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी RITES Limited और बांग्लादेश रेलवे के बीच 200 ब्रॉडगेज यात्री कोचों की आपूर्ति के लिए करीब 915 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। परियोजना को यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) की वित्तीय सहायता प्राप्त है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहली खेप में 18 कोच भारत से बांग्लादेश भेजे गए। इन डिब्बों को कपूरथला के हुसैनपुर से रवाना किया गया और वे बांग्लादेश के दर्शना रेलवे स्टेशन पहुंचे। बाकी 182 कोचों की आपूर्ति दिसंबर 2027 तक अलग-अलग चरणों में किए जाने का लक्ष्य है।
हरे रंग के कोचों में यात्रियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
इन डिब्बों का डिजाइन बांग्लादेश में रेल यात्रियों की यात्रा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पहली खेप में अलग-अलग श्रेणियों के कोच शामिल हैं।
- नॉन-एसी शोवोन चेयर कार: 11 कोच, जिनमें आरामदायक सीटों के साथ फुटरेस्ट और स्टेनलेस स्टील के आर्मरेस्ट दिए गए हैं।
- एसी चेयर कार: 3 कोच, जिनमें वातानुकूलन और बैठने की आधुनिक व्यवस्था है।
- एसी स्लीपर कोच: 2 कोच, जिनमें सोने के लिए बर्थ और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- एसी पावर कार: 2 कोच, जिनमें बिजली आपूर्ति और अन्य परिचालन जरूरतों के लिए व्यवस्था की गई है।
इन 18 कोचों में लंबी दूरी की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए अलग-अलग प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें नमाज या प्रार्थना के लिए निर्धारित स्थान और छोटे बच्चों की देखभाल के लिए बेबी केयर रूम जैसी सुविधाएं भी शामिल बताई गई हैं।
कोच की छत को मजबूत बनाने पर क्यों दिया गया जोर?
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता कोचों की छत का डिजाइन है। बांग्लादेश में भीड़भाड़ वाले रेल मार्गों पर यात्रियों के डिब्बों की छत पर चढ़कर सफर करने की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में इन कोचों की छत को मजबूत संरचना के साथ तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, मजबूत छत का मतलब यह नहीं है कि उस पर यात्रियों का सफर करना सुरक्षित या अधिकृत है। रेलगाड़ी की छत पर चढ़ना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
बांग्लादेश के मानकों के अनुरूप तैयार किए गए कोच
निर्यात के लिए बनाए गए इन डिब्बों में बांग्लादेश रेलवे की तकनीकी जरूरतों के अनुसार बदलाव किए गए हैं। रिपोर्ट में इनके इलेक्ट्रिकल सिस्टम को 425 वोल्ट के मानक के अनुरूप तैयार किए जाने का उल्लेख है।
इसके अतिरिक्त, कोचों में सीसीटीवी कैमरे, आपातकालीन अलार्म, आधुनिक खिड़कियां और यात्रियों की सुविधा के लिए रिक्लाइनिंग सीटें जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। स्लीपर श्रेणी के डिब्बों में बर्थ और यात्रियों की निजता को ध्यान में रखकर सुविधाएं दी गई हैं।
राजनीतिक तनाव के बीच भी जारी है रेल सहयोग
शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कई मुद्दों पर तनाव देखने को मिला है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच पहले से तय कुछ व्यापारिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं।
रेल कोचों की यह आपूर्ति भी इसी सहयोग का हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, पहली खेप के परिवहन और संचालन से फिरोजपुर रेलवे मंडल को लगभग 91.73 लाख रुपये का राजस्व मिला है।
भारत इससे पहले भी बांग्लादेश को यात्री कोच और रेल इंजन उपलब्ध करा चुका है। ऐसे में 200 कोचों की यह परियोजना दोनों देशों के बीच रेल क्षेत्र में जारी तकनीकी और व्यावसायिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाली पहल मानी जा रही है।





