सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों नेताओं को 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे क्राइम ब्रांच के कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद बाहर निकलते समय पुलिस ने उन्हें यह नोटिस सौंपा था।
रिपोर्ट : प्रीती पांडेय
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में होगी पूछताछ
इस मामले में पुलिस सौरव दास और आशुतोष रांका से सरकारी आदेश का पालन नहीं करने और कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर जंतर-मंतर पहुंचने से जुड़े आरोपों पर पूछताछ करेगी। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कार्रवाई की बात सामने आई है। यह धारा लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है।
पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच की WR-1 यूनिट को सौंप दी है। इस प्रकरण में अजिंक्य शिंदे की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस उनसे संपर्क कर पूछताछ में शामिल होने के लिए समन्वय कर रही है।
50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली रिहाई

सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार पेश करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया था। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्य कर रहीं सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) रितु राज ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों की रिहाई के निर्देश दिए थे।
रिहाई के दौरान दोनों नेताओं से एक शपथपत्र भी लिया गया। इसमें उन्होंने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया। साथ ही आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि भविष्य में होने वाले किसी भी प्रदर्शन को संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही आयोजित किया जाएगा।
अब क्राइम ब्रांच की जांच पर नजर
जेल से रिहाई के बाद अब सौरव दास और आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। जांच के दौरान पुलिस संबंधित घटनाक्रम, कथित आदेश उल्लंघन और जंतर-मंतर तक पहुंचने से जुड़े पहलुओं पर सवाल कर सकती है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगी।





