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सौरव दास और आशुतोष रांका जेल से रिहा, अभिजीत दीपके बोले- ‘जान हाज़िर है!’

सौरव दास और आशुतोष रांका बाहर आए जेल से, अभिजीत दीपके बोले- मुझसे बड़े नेता हैं दोनों

 

रिपोर्ट: प्रीती पांडेय 

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार, 21 अक्टूबर को अदालत से राहत मिल गई। दोनों के जमानत बांड स्वीकार किए जाने के बाद तिहाड़ जेल से उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। करीब सात दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद दोनों नेताओं के बाहर आने पर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने से बड़ा नेता बताया और कहा कि उनके निर्देशों का पालन करने के लिए वह तैयार हैं।

दीपके ने अपने संदेश में लिखा, “सौरव और आशु न सिर्फ मुझसे बेहतर हैं, बल्कि मुझसे बहुत-बहुत बड़े नेता हैं। अपने नेताओं के हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार हूं। जान हाज़िर है!”

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और शांति बनाए रखने से जुड़े कानूनी आदेशों के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। पुलिस ने आरोप लगाया था कि संबंधित नेताओं ने प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन की कोशिश की और पहले दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया।

10 अक्टूबर को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। उस समय शांति बनाए रखने का आश्वासन और निर्धारित मुचलके देने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।

हालांकि, पुलिस ने बाद में आरोप लगाया कि आशुतोष रांका और सौरव दास ने जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और पहले दिए गए आश्वासन का उल्लंघन किया। इसके बाद दोनों को दोबारा हिरासत में लेकर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया।

हिरासत बढ़ाने के आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद उनके वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने उन्हें पहले संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में उपलब्ध कानूनी विकल्प अपनाने की सलाह दी।

इसके बाद बचाव पक्ष ने अपनी याचिका वापस ले ली और एसईएम अदालत में राहत के लिए प्रयास किया। बुधवार को मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोनों नेताओं के जमानत बांड स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया।

इससे पहले 19 अक्टूबर को अदालत ने दोनों की हिरासत दो दिन बढ़ा दी थी। उस समय अदालत ने उनके पिछले आचरण, शांति भंग होने की आशंका और पेश किए गए जमानतियों की पात्रता पर सवाल उठाए थे।

अदालत की टिप्पणियों और बचाव पक्ष की दलीलों में क्या अंतर रहा?

पुलिस और अभियोजन पक्ष की दलील थी कि दोनों नेताओं के कथित आचरण से सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ निवारक कानूनी कार्रवाई की गई।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध और मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल को अपने आप शांति भंग करने का आधार नहीं माना जाना चाहिए। वकीलों ने कार्रवाई की प्रक्रिया और हिरासत के औचित्य पर भी सवाल उठाए थे।

इस मामले में रिहाई का आदेश आने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सभी आरोपों पर अंतिम फैसला सुना दिया है। दोनों नेताओं को राहत मिलने के बाद भी संबंधित कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

अभिजीत दीपके को पहले ही मिल चुकी थी रिहाई

सीजेपी के प्रस्तावित तिरंगा मार्च के बीच कनॉट प्लेस सेंट्रल पार्क बंद रखने का फैसलाI

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को इससे पहले ही रिहा किया जा चुका था। उन्हें 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था। रिहाई के बाद उन्होंने अपने संगठन के अन्य नेताओं की वापसी की उम्मीद जताई थी।

अब सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल से बाहर आने के बाद दीपके की प्रतिक्रिया चर्चा में है। उन्होंने दोनों को अपना नेता बताते हुए उनके प्रति समर्थन और भरोसा जाहिर किया।

फिलहाल इस पूरे मामले में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, शांति बनाए रखने से जुड़े मुचलकों और निवारक कार्रवाई की कानूनी सीमाओं को लेकर बहस जारी है।

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