रिपोर्ट : प्रीती पांडेय
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतगणना के बीच मतदाता पर्ची में नाम की गलती को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला तब और बढ़ गया, जब उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा के आधिकारिक एक्स हैंडल से इस मुद्दे पर ऐसी टिप्पणी की गई, जिस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से पोस्ट की भाषा पर खेद जताते हुए माफी मांगी गई।
मतदाता पर्ची में पिता के नाम की जगह लिखी गई गलत जानकारी 
विवाद की शुरुआत एक मतदाता पर्ची से हुई, जिसमें मतदाता का नाम रवि शर्मा दर्ज था, जबकि पिता के नाम वाले कॉलम में ‘राम ने शर्मा को मारा’ लिखा हुआ था। इस कथित गलती का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया।
आम आदमी पार्टी से जुड़े एक्स यूजर संजय सिंह ने इस मामले को उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने अपनी पोस्ट में तंज कसते हुए पूछा कि अगर कंप्यूटर की गलती से किसी नाम के साथ ऐसा हुआ है, तो क्या यह गलती जातिगत पूर्वाग्रह को दर्शाती है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि इस तरह की त्रुटि किसी अन्य जाति के व्यक्ति के नाम के साथ क्यों नहीं दिखाई दी। इसके साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया।
CEO के आधिकारिक हैंडल से की गई टिप्पणी पर विवाद
संजय सिंह की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक एक्स हैंडल से जवाब दिया गया। पोस्ट में मतदाता सूची में दर्ज नाम को असामान्य बताते हुए गलती स्वीकार की गई। हालांकि, इसी जवाब में जाति और धार्मिक पहचान का जिक्र करते हुए की गई टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
पोस्ट में कहा गया कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होता और गलती के लिए जिम्मेदारी स्वीकार की जाती है। इसके बाद जातिगत भेदभाव और अल्पसंख्यक समुदाय का संदर्भ देते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की गई। आधिकारिक हैंडल से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे।
आलोचना के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक और पोस्ट साझा की गई। इसमें पहले की पोस्ट की भाषा और उसके भाव को आधिकारिक संचार के मानकों के अनुरूप नहीं माना गया।
पोस्ट में कहा गया कि टिप्पणी से आहत और नाराज लोगों की भावनाओं को गंभीरता से लिया गया है। साथ ही, संबंधित लोगों से ईमानदारी से माफी मांगी गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि भविष्य में आधिकारिक हैंडल से होने वाला संवाद शालीन और औपचारिक भाषा में किया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने मतदाता पर्ची में हुई कथित गलती के साथ-साथ चुनाव संबंधी आधिकारिक संचार में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर भी बहस छेड़ दी है।





