लोड हो रहा है...
ब्रेकिंग न्यूज़
खबरें लोड हो रही हैं...
हमें फॉलो करें :

AK-47 फायरिंग पर SP अंकिता शर्मा को नोटिस, दूसरे अफसरों पर मेहरबानी क्यों?

छत्तीसगढ़ में शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग के वीडियो वायरल होने से विवाद, कार्रवाई में कथित भेदभाव को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल

रिपोर्ट- संतेश्वर वर्मा

छत्तीसगढ़। विजयादशमी के मौके पर शस्त्र पूजन के दौरान AK-47 से फायरिंग करना छत्तीसगढ़ की पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा के लिए मुश्किलें खड़ी कर गया है। शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग करते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने मामले का संज्ञान लिया। राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अजय यादव ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

हालांकि, यह मामला अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है। बलौदाबाजार के SP गौरव राय समेत दूसरे जिलों के पुलिस अधिकारियों के भी शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने की चर्चा है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स पूछ रहे हैं कि जब अलग-अलग जिलों से इस तरह के वीडियो सामने आए हैं, तो कार्रवाई का दायरा एक अधिकारी तक ही क्यों सीमित है?

अंकिता शर्मा को नोटिस, जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद अंकिता शर्मा से जवाब तलब किया गया है। कारण बताओ नोटिस जारी होने का मतलब फिलहाल उनसे घटना के संबंध में स्पष्टीकरण मांगना है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और विभागीय समीक्षा के आधार पर तय होगी।

इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग में अनुशासन और हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा मानकों पर भी चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह है कि शस्त्र पूजन जैसे औपचारिक आयोजन में हथियार चलाने की जरूरत क्या थी और इस तरह की गतिविधियों के लिए विभागीय स्तर पर क्या नियम लागू होते हैं?

गौरव राय समेत अन्य अधिकारियों के वीडियो पर भी सवाल

बलौदाबाजार के SP गौरव राय का भी शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग करते हुए वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत अन्य जिलों के अधिकारियों के वीडियो भी चर्चा में हैं।

इन घटनाओं के सामने आने के बाद कार्रवाई की समानता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि यदि अलग-अलग अधिकारियों के मामलों में समान तरह की परिस्थितियां हैं, तो सभी की जांच एक समान मानकों के आधार पर होनी चाहिए।

हालांकि, प्रत्येक वीडियो की परिस्थितियां और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए दूसरे अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होने का निष्कर्ष निकालने से पहले विभाग की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

पुलिस अनुशासन बनाम परंपरा, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस मामले में सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि पुलिस अधिकारियों को कानून, अनुशासन और सुरक्षा के मामले में अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। वर्दी में तैनात अधिकारियों का आचरण आम लोगों के लिए भी एक उदाहरण होता है।

वहीं, कुछ लोग शस्त्र पूजन के दौरान हथियारों के प्रदर्शन को परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं। उनका तर्क है कि पूरे मामले का आकलन वीडियो के आधार पर जल्दबाजी में करने के बजाय आयोजन की परिस्थितियों और लागू नियमों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

अब विभाग के अगले कदम पर टिकी नजरें

SP अंकिता शर्मा को नोटिस जारी होने के बाद अब उनके जवाब और पुलिस मुख्यालय के रुख पर नजर रहेगी। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि दूसरे जिलों से सामने आए वीडियो के संबंध में विभाग क्या कदम उठाता है।

फिलहाल यह मामला पुलिस अधिकारियों के आचरण, हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल और प्रशासनिक कार्रवाई में समानता को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें